Abhishek Banerjee Office पर बागी गुट का दावा, TMC में बढ़ा सियासी संकट

Abhishek Banerjee Officeपश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों अपने सबसे बड़े आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रही है। विधानसभा चुनाव में झटके के बाद पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। पहले विधानसभा में बगावती सुर सुनाई दिए और अब लोकसभा में भी पार्टी के खिलाफ एक मजबूत गुट खड़ा होता नजर आ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अब दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय को लेकर भी विवाद सामने आ गया है।


सूत्रों के अनुसार, TMC Rebel MP ने दिल्ली में पार्टी के कार्यालय पर दावा जताते हुए उसे खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में बागी सांसद Partho Bhowmik की ओर से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee को पत्र भेजा गया है।

Abhishek Banerjee Office: दिल्ली कार्यालय को लेकर नया विवाद

Delhi Party Officeदिल्ली में 20 राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित सरकारी आवास से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का दफ्तर संचालित होता है। यह आवास सांसद Partho Bhowmik को आवंटित है। वर्तमान में Partho Bhowmik पार्टी के बागी खेमे के प्रमुख चेहरों में शामिल बताए जा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि इसी वजह से कार्यालय के इस्तेमाल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। बागी गुट का मानना है कि संगठन में बदलते समीकरणों को देखते हुए दफ्तर के संचालन पर भी पुनर्विचार होना चाहिए। इस मुद्दे ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

नेता प्रतिपक्ष को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला 

TMC की अंदरूनी खींचतान अब Abhishek Banerjee Office के न्यायिक दायरे तक पहुंच चुकी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) की मान्यता को लेकर पार्टी और विधानसभा अध्यक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। दरअसल, विधानसभा अध्यक्ष Rathindra Bose ने बागी नेता Ritabrata Banerjee को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता प्रदान कर दी थी। इस फैसले का विरोध करते हुए TMC ने Calcutta High Court का दरवाजा खटखटाया है।

पार्टी का तर्क है कि यह निर्णय संसदीय परंपराओं और स्थापित नियमों के अनुरूप नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता Sirsanya Bandyopadhyay के माध्यम से दायर याचिका में Speaker के फैसले की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee द्वारा नामित वरिष्ठ नेता Shobhandev Chattopadhyay को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने की अपील भी की गई है। इस मामले पर गुरुवार 11 जून को Justice Krishna Rao की एकल पीठ में सुनवाई होने की संभावना है।

80 में से 58 विधायकों का समर्थन बागी खेमे के साथ

TMC के लिए सबसे बड़ी चिंता विधानसभा में विधायकों का बदलता रुख है। पिछले सप्ताह पार्टी के 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने Ritabrata Banerjee के समर्थन में खड़े होकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी।

गौरतलब है कि Ritabrata Banerjee को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया गया था। हालांकि निष्कासन के महज दो दिन बाद उन्होंने 58 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए नेता प्रतिपक्ष पद के लिए अपना दावा पेश कर दिया। इसी क्रम में एक अन्य निष्कासित विधायक Sandipan Saha को विधानसभा अध्यक्ष ने सहायक नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता प्रदान कर दी। इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि विधानसभा के भीतर TMC नेतृत्व की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रह गई है।

लोकसभा में भी अलग गुट बनाने की कोशिश 

संकट केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है। लोकसभा में भी TMC के भीतर अलग राजनीतिक धारा बनने के संकेत मिल रहे हैं। हाल ही में पार्टी के कई असंतुष्ट सांसदों ने केंद्रीय मंत्री Bhupender Yadav के आवास पर बैठक की थी। इस बैठक में West Bengal के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के भी मौजूद रहने की चर्चा है। बैठक के बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं।

बताया जा रहा है कि वरिष्ठ सांसद Kakoli Ghosh Dastidar ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को एक पत्र सौंपा है। इस पत्र में TMC के 20 सांसदों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है। पत्र के माध्यम से लोकसभा में अलग गुट को मान्यता देने की मांग की गई है।

किन सांसदों के नाम आ रहे सामने? 

लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। हालांकि पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सभी सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। फिर भी सूत्रों के हवाले से जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनमें काकोली घोष दस्तीदार, पार्थो भौमिक, प्रसून बनर्जी, असित माल, शर्मिला सरकार, जगदीश बसुनिया, कालीपद सोरेन, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी और अभिनेता-सांसद देव शामिल बताए जा रहे हैं। इन नामों ने यह संकेत दिया है कि असंतोष पार्टी के विभिन्न स्तरों तक पहुंच चुका है।

राज्यसभा से भी लगा झटका 

TMC को हाल ही में राज्यसभा में भी बड़ा झटका लगा है। सोमवार को पार्टी के वरिष्ठ सांसद Sukhendu Sekhar Roy ने राज्यसभा की सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे को भी पार्टी में बढ़ते असंतोष और नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।

ऐसे में विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा तीनों स्तरों पर उभर रही बगावत ने Abhishek Banerjee Office के लिए तृणमूल कांग्रेस के सामने गंभीर राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में अदालत, विधानसभा और संसद में होने वाले घटनाक्रम यह तय करेंगे कि पार्टी इस संकट से उबर पाती है या फिर आंतरिक संघर्ष और गहरा होता है।

Read This Also:- Madhya Pradesh Rajya Sabha: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द

For all the political updates download our Molitics App : Click here to Download