Mahesh Kewat Candidate: BJP का राज्यसभा दांव, मध्य प्रदेश में हलचल

Mahesh Kewat Candidate: मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी रंगत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने तीसरे उम्मीदवार के तौर पर Mahesh Kevat को मैदान में उतारकर राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश की है। यह कदम खासकर केवट समुदाय और बुंदेलखंड क्षेत्र में पार्टी की पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।


Mahesh Kewat Candidate: तीसरे उम्मीदवार का ऐन वक्त पर नामांकन 

MP Rajya Sabhaराज्यसभा की तीन खाली सीटों के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा में चुनाव होना है। विधानसभा के वर्तमान गणित के अनुसार, तीन सीटों में से दो पर BJP और एक पर कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही थी। पहले ही BJP ने दो सीटों के लिए तरुण चुग और Rajnish Agrawal को उम्मीदवार घोषित किया था। दोनों नेताओं ने नामांकन पत्र भी दाखिल कर दिया है।

कांग्रेस ने एक सीट के लिए Meenakshi Natarajan को मैदान में उतारा है। ऐसे में BJP ने आखिरी पल में तीसरे उम्मीदवार के तौर पर Mahesh Kevat का नामांकन कर कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके चलते कांग्रेस के भीतर Cross-Voting का खतरा उत्पन्न हो गया है।

महेश केवट का राजनीतिक सफर 

Mahesh Kevat Candidate वर्तमान में मध्य प्रदेश में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं। BJP ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर मछुआरा समुदाय को साधने का प्रयास किया है। महेश केवट 1984 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हुए हैं। उन्होंने ओरछा शाखा में मुख्य शिक्षक के रूप में कार्य किया और छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के ब्लॉक संयोजक के रूप में सक्रिय रहे। इसके साथ ही वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के निवाड़ी प्रखंड कार्यकारिणी में सचिव भी रह चुके हैं।

1995 से Mahesh Kevat बीजेपी की सक्रिय राजनीति में हैं। वे जिला कार्यसमिति के सदस्य, नगर परिषद पार्षद और नगर परिषद ओरछा के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में संगठन की जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने हरियाणा विधानसभा चुनाव, शहडोल लोकसभा उपचुनाव, चित्रकूट, मुंगावली और पृथ्वीपुर उपचुनावों में संगठनात्मक भूमिका निभाई।

केवट समाज में प्रभाव और बीजेपी की रणनीति 

बीजेपी Mahesh Kevat को एक ऐसे नेता के रूप में पेश कर रही है जिसने जमीनी स्तर से उठकर राष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया है। पार्टी ने केवट समाज के इस बड़े चेहरे को उतारकर बुंदेलखंड में अपने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने Mahesh Kevat के नामांकन के बाद कहा कि BJP अपनी तीनों राज्यसभा सीटों से जीत हासिल करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी ने विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए उच्च सदन में प्रतिनिधित्व दिया है।

Mahesh Kevat ने भी इस अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री Mohan Yadav का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा का टिकट मिलने पर वह जनता की सेवा करने का अवसर पाएंगे और इसके लिए उन्होंने प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व को धन्यवाद दिया।

कांग्रेस में बढ़ी चिंता

BJP के तीसरे उम्मीदवार Mahesh Kewat Candidate के नामांकन के बाद कांग्रेस के अंदर खलबली मच गई है। पार्टी के पास विधानसभा में कुल 62 वोट हैं और एक सीट जीतने के लिए उन्हें 58 वोटों की आवश्यकता है। वहीं, तीसरी सीट के लिए BJP को केवल आठ अतिरिक्त वोट चाहिए।

कांग्रेस ने विधायकों की एकजुटता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। पार्टी के विधायकों को दूसरे राज्य कर्नाटक में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है, जहां कांग्रेस की सरकार है। सूत्रों के अनुसार विधायकों को आज (मंगलवार, 9 जून) दोपहर 12 बजे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बंगले से रवाना किया जाएगा। इस दौरान विधायकों को परिवार के सदस्य साथ ले जाने की अनुमति है, लेकिन स्टाफ को नहीं। कांग्रेस के लिए यह कदम इसलिए आवश्यक है ताकि उनके वोट सुरक्षित रहें और किसी तरह की क्रॉस वोटिंग न हो।

राजनीतिक समीकरण और आगे की संभावनाएँ 

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की इस नई स्थिति ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। Madhya Pradesh Politics में BJP का तीसरे उम्मीदवार के तौर पर महेश केवट को उतारना न केवल केवट समाज और बुंदेलखंड क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से है, बल्कि यह कांग्रेस में संकट की घड़ी भी पैदा कर रहा है।

कांग्रेस के लिए यह चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि उनके विधायकों का वोट किसी अन्य पार्टी के पक्ष में न जाए। वहीं BJP अपनी रणनीति के दम पर राज्यसभा में तीनों सीटों पर जीत हासिल करने के प्रति आश्वस्त दिखाई दे रही है। इस बार के राज्यसभा चुनाव में Mahesh Kevat की जीत या हार न केवल BJP के लिए बल्कि कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती की परीक्षा भी साबित होगी।

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