
अंगोला में बाढ़ से खनिज निर्यात ठप, सप्लाई प्रभावित
मिडिल-ईस्ट में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के दौरान भारत को तेल संकट का सामना करना पड़ा था। उस समय दक्षिण अफ्रीकी देश अंगोला ने भारत की मदद की और तेल का निर्यात कर संकट कम किया। 2026 तक भारत में तेल सप्लाई में अंगोला तीसरे स्थान पर है। हालांकि, अब वही देश खुद प्राकृतिक आपदा और बाढ़ की मार झेल रहा है, जिससे अंगोला खनिज निर्यात भी ठप हो गया है।
अंगोला खनिज निर्यात, बाढ़ का कहर
अंगोला में लोबिटो कॉरिडोर से गुजरने वाली रेलवे लाइन को रविवार को अनिश्चित काल के लिए बंद करना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि पास की नदियों में पानी का स्तर बढ़ने और बाढ़ आने के कारण कुबाल और कैम्बाम्बो के बीच हैलो नदी पर बने पुल, तथा बेंग्वेला के पास कैवाको नदी पर बने पुल प्रभावित हुए। इस कारण रेल यातायात पूरी तरह से ठप हो गया, जिससे अंगोला खनिज निर्यात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।
रेलवे का आर्थिक महत्व
लोबिटो अटलांटिक रेलवे की लाइनों का निर्माण 2022 में ट्रैफिगुरा, मोटा-एंगेल और वेक्टुरिस जैसे साउथ अफ्रीकी कंसोर्टियम द्वारा किया गया था। इसे 30 साल की रियायत दी गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) से अटलांटिक तट पर लोबिटो पोर्ट तक तांबा और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का तेज़ और सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना है। इस रेलवे का उपयोग DRC की खानों तक सल्फर पहुँचाने के लिए भी किया जाता है। साथ ही बंदरगाह से कृषि उत्पाद और औद्योगिक सामान भी इसी मार्ग से ले जाया जाता है। हालांकि, हालिया लोबिटो कॉरिडोर व्यवधान और बाढ़ रेलवे निलंबन के कारण इस महत्वपूर्ण रूट पर संचालन प्रभावित हुआ है।
जलवायु परिवर्तन के चलते दक्षिणी अफ्रीका में बाढ़ की समस्या बढ़ रही है। इससे रेल परिवहन प्रभावित हो रहा है, और खनिजों की निर्यात श्रृंखला पर भी संकट उत्पन्न हो रहा है।
भारत-अंगोला संबंध
अंगोला भारत का प्रमुख तेल सप्लायर है। 2026 में यह रूस के बाद भारत को तेल की आपूर्ति में दूसरे स्थान पर रहा। आंकड़ों के अनुसार, रूस से भारत के तेल आयात में वृद्धि हुई, 1,042 हजार बैरल से बढ़कर 1,975 हजार बैरल हो गया।
भारत और अंगोला का रिश्ता काफी पुराना है। यह संबंध पुर्तगाल के उपनिवेश काल से जुड़ा है। 1761 में भारत ने अंगोला की स्वतंत्रता का समर्थन किया था। औपचारिक कूटनीतिक संबंध 1985 में स्थापित हुए। उस समय से दोनों देशों के बीच व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग जारी है।
भविष्य की चुनौतियां
हालांकि अंगोला ने भारत की मदद की थी, अब प्राकृतिक आपदाओं और बाढ़ के कारण रेल मार्ग ठप हो गया है। यह खनिज निर्यात और तेल सप्लाई पर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती को देखते हुए इस क्षेत्र में लंबी अवधि के लिए आपात योजनाओं की जरूरत है।
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