
सोनिया गांधी का हमला, बोली- महिला आरक्षण नहीं, मुद्दा परिसीमन
सोनिया गांधी ने हमला करते हुए, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर सरकार की हालिया पहल पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं बल्कि परिसीमन है। उन्होंने यह बात संसद में प्रस्तावित 3 दिवसीय स्पेशल सत्र से पहले एक अखबार में प्रकाशित अपने लेख में कही।
सोनिया गांधी का हमला
सोनिया गांधी ने हमला जारी रखते हुए, उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार स्पेशल सत्र बुला रही है ताकि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी अभियान के दौरान संसद में जरूरी विधेयक जल्दबाजी में पारित कराए जा सकें। उनके अनुसार इस जल्दबाजी का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ उठाना और विपक्ष को दबाव में लाना है।
उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री विपक्षी दलों से ऐसे विधेयकों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं, जबकि महिला आरक्षण मुद्दा केवल बहाना है जिन्हें चुनावी दृष्टि से फायदेमंद बनाने के लिए समय से पहले पारित करवाया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
महिला आरक्षण विवाद नहीं
सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण अधिनियम 2023 में ही पास हो चुका है और इसे लागू करने का असली मुद्दा जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष ने इसे लागू करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। अब सरकार इसे 2029 से लागू करने की बात कर रही है। सोनिया ने इसे 30 महीने के भीतर किए गए यू टर्न पर सवाल उठाया।
दक्षिणी राज्यों की चिंता
सोनिया ने परिसीमन को लेकर भी गंभीर आशंकाएं जताईं। उनका कहना है कि जनगणना में देरी के कारण 10 करोड़ लोग खाद्य सुरक्षा लाभ से वंचित रह गए। परिसीमन के दौरान लोकसभा सीटों की बढ़ोतरी में राजनीतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने चेताया कि दक्षिण और छोटे राज्यों को इस प्रक्रिया में नुकसान हो सकता है और इसे जल्दबाजी में करना संविधान पर हमला है।
सोनिया गांधी ने कहा कि जातिगत जनगणना और लोकसभा सीटों की बढ़ोतरी केवल आंकड़ों पर आधारित नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से न्यायसंगत तरीके से की जानी चाहिए।
सरकार का असली एजेंडा
लेख में उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि महिला आरक्षण केवल नैरेटिव सेट करने के लिए प्रयोग किया जा रहा है, जबकि केंद्र का असली एजेंडा परिसीमन है। उन्होंने स्पेशल सत्र बुलाने की समय-सारणी पर भी सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष की मांग थी कि सर्वदलीय बैठक 29 अप्रैल के बाद बुलाई जाए, लेकिन सरकार ने इसे ठुकरा दिया।
सोनिया गांधी की आलोचना ने केंद्र सरकार की रणनीति पर नई बहस छेड़ दी है और आगामी चुनावों के संदर्भ में राजनीतिक परिदृश्य को और रोचक बना दिया है।
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