निशिकांत दुबे के बयान पर विवाद, दुबे ने बीजू से मांगी माफी

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को लेकर दिए गए बयान पर घिरे बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने आखिरकार सफाई देते हुए बिना शर्त माफी मांग ली है; निशिकांत दुबे के बयान पर विवाद के बीच उन्होंने कहा कि उनकी बातों का गलत अर्थ निकाला गया और उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।


निशिकांत दुबे के बयान पर विवाद

निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार के संदर्भ में अपनी बात रखी थी, लेकिन उसे बीजू पटनायक से जोड़कर देखा गया; निशिकांत दुबे के बयान पर विवाद के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान व्यक्तिगत था और इसका गलत अर्थ निकाला गया।

दुबे ने कहा, बीजू बाबू हमारे लिए हमेशा एक ऊंचे कद के राजनेता रहे हैं और आगे भी रहेंगे; बीजेडी बनाम बीजेपी, ओडिशा के बीच बढ़ते सियासी तनाव के बीच उन्होंने जोड़ा कि अगर मेरे बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं इसके लिए बेशर्त क्षमा चाहता हूं।

बीजेपी नेताओं ने भी जताई नाराजगी 

इस विवाद पर बीजेपी के भीतर से भी असहमति के स्वर सुनाई दिए। पार्टी के वरिष्ठ नेता बैजयंत जय पांडा ने बिना नाम लिए कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजू पटनायक न केवल ओडिशा के एक बड़े नेता थे, बल्कि देश के अग्रणी राष्ट्रनिर्माताओं में भी शामिल थे।

पांडा ने कहा कि उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना पूरी तरह अस्वीकार्य है और इस तरह की टिप्पणियां न केवल गलत बल्कि अपमानजनक भी हैं। उन्होंने बीजू पटनायक को आधुनिक भारत के महान देशभक्तों में से एक बताया।

विधानसभा में गूंजा मामला

इस बयान का असर ओडिशा की राजनीति में भी देखने को मिला। राज्य विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी दलों, बीजू जनता दल (BJD), कांग्रेस और वाम दलों, ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और बीजेपी सांसद के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की।

सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सदस्य आसन के पास पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। विपक्ष के उपनेता प्रसन्ना आचार्य ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग उठाई, जबकि विधायक रानेंद्र प्रताप स्वैन ने औपचारिक रूप से निंदा प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया।

क्या था पूरा विवाद

दरअसल, 27 मार्च को निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि 1960 के दशक में चीन के साथ तनाव के दौरान बीजू पटनायक, जवाहरलाल नेहरू और अमेरिकी खुफिया एजेंसी के बीच एक कड़ी के रूप में काम कर रहे थे। इस बयान के बाद ओडिशा में व्यापक नाराजगी देखने को मिली। 

राज्य के कई हिस्सों में युवाओं और छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए और बीजेपी सांसद के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके पुतले भी जलाए।

हालांकि अब निशिकांत दुबे ने अपने बयान पर सफाई देते हुए माफी मांग ली है, लेकिन यह विवाद ओडिशा की राजनीति में हलचल पैदा कर चुका है। बीजू पटनायक जैसी सम्मानित शख्सियत को लेकर की गई टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है और आने वाले समय में इसके राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकते हैं।

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