
Himachal Pradesh Landslide: कुल्लू-मनाली हाईवे बदहाली में, ब्यास नदी का कहर
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश ने इस बार एक और तबाही मचा दी है। Himachal Pradesh Landslide की वजह से कुल्लू-मनाली हाईवे पर हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। ब्यास नदी जब उफान पर आई, तब इलाके में फैल गया अंधेरा और मलबा—a एहसास रोकना मुश्किल हो गया। सड़क का एक हिस्सा बह चुका है, कई वाहन मलबे में दब गए और राहगीर फंस गए। प्रशासन बचाव और राहत में जुटा है, लेकिन मौसम की बेरहमी हर प्रयास को धीमा कर रही है।
यह Himachal Pradesh Landslide एक सिरदर्द बन गया है—पर्यटन, लोकजीवन और यात्रा सब कुछ ठप हो गया है। स्थानीय लोग व पर्यटक दहशत में हैं, क्योंकि नेशनल हाईवे भरपूर क्षतिग्रस्त है और अभी तक बहाल नहीं हुआ है। इस बार की Manali landslide ने पहले से ही संवेदनशील इस इलाके की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
यातायात ठप और सैलानी फंसे
इस Himachal Pradesh Landslide के चलते कुल्लू-मनाली हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठहर गया है। कई यात्री और सैलानी घंटों कारों और बसों में फंसे हुए हैं, अपने हालात को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को रवाना किया है और हेलीकॉप्टर से कुछ लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि जब तक हालात सामान्य न हों, यात्रा टाल दें। राहत शिविर बनाए गए हैं, लेकिन रास्तों पर मलबा और बाढ़ का पानी अभी भी बिगाड़ रहा है। Himachal Pradesh Landslide की मार इतनी गंभीर रही कि कई गांवों से संपर्क टूट चुका है, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं बाधित हो चुकी हैं। Manali landslide की वजह से कई पर्यटक अपने होटलों में फंसे हुए हैं और आपात सेवाएं उन्हें लगातार सहयोग देने में जुटी हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और भविष्य की चुनौतियाँ
राज्य सरकार और केन्द्र सरकार ने राहत कार्यों को युद्धस्तर पर शुरू किया है। मलबा हटाने और मार्ग बहाल करने की कोशिश जारी है। प्रभावितों को मुआवजा और अस्पतालों में मुफ्त इलाज का भरोसा दिया गया है। इस Himachal Pradesh Landslide की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अब पर्यावरण और आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देनी होगी।
विशेषज्ञ जोर दे रहे हैं कि पहाड़ी निर्माण में पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। कहीं भी पेड़ कटान, अनियोजित निर्माण और जल निकासी की अनदेखी चली तो आने वाले समय में आम जन जीवन और सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकती है। Manali landslide जैसी घटनाएं केवल प्राकृतिक आपदा नहीं हैं, बल्कि चेतावनी हैं कि हमें विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को भी गंभीरता से लेना होगा।
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