Karnataka Caste Census: नई रिपोर्ट से सियासत और आरक्षण पर हलचल

Karnataka Caste Censusकर्नाटक में सियासी गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री Siddaramaiah के इस्तीफे की चर्चाओं के बीच राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने उन्हें लंबे समय से प्रतीक्षित जाति जनगणना रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट, जो पिछले नौ साल से चर्चा में थी, राज्य में जातिगत जनसंख्या की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय राज्य का सबसे बड़ा समुदाय है।


मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह रिपोर्ट उन्हें विधान सौधा स्थित उनके कार्यालय में सौंपी गई। पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष Madhusudan Naik ने बताया कि यह सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार की गई थी। रिपोर्ट की प्राप्ति से पहले ही कयास लगाए जा रहे थे कि Siddaramaiah अगले दिन इस्तीफा दे सकते हैं।

Karnataka Caste Census: जातिगत आंकड़ों की झलक

Muslim Population Reportरिपोर्ट में राज्य की कुल जनसंख्या में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी 14% बताई गई है, यानी लगभग 75.25 लाख लोग मुस्लिम समाज से हैं। रिपोर्ट में आगे के आंकड़े इस प्रकार हैं: मुस्लिम समुदाय: 75-80 लाख (14% आबादी) वीरशैव लिंगायत: 60-65 लाख (11% आबादी) वोक्कालिगा समुदाय: 55-60 लाख (10% आबादी) कुरुबा समुदाय: 40-45 लाख (8% आबादी)

Madhusudan Naik ने कहा कि रिपोर्ट लगभग 300 पृष्ठों की है और इसमें सभी प्रमुख जातियों का विवरण शामिल है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण में जिन लोग शामिल नहीं हुए, उनके आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए कुछ कमी संभव है।

रिपोर्ट सौंपने की प्रक्रिया और तारीख

मूल रूप से Karnataka Caste Census रिपोर्ट 30 मई को मुख्यमंत्री को सौंपनी थी। लेकिन छुट्टी और अन्य व्यवस्थाओं के कारण इसे 29 मई की बजाय 28 मई को ही दिया गया। पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि रिपोर्ट के अनुवाद और तैयारियों में समय लगा। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि रिपोर्ट का मुख्यमंत्री के इस्तीफे से कोई संबंध नहीं है।

मुस्लिमों का सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण और आरक्षण का मुद्दा

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुस्लिम एक धर्म है और सामाजिक रूप से वे उपेक्षित नहीं माने जाते। इसलिए, सामान्य धारणा के अनुसार उन्हें आरक्षण की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, इतिहास में हावनूर आयोग (1974) ने लिंगायत, ईसाई और मुसलमान समुदायों को आरक्षण देने से इंकार किया था।

इसके बाद Supreme Court ने 1985 में निर्णय दिया कि मुस्लिम समाज शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। Karnataka Caste Census से जुड़ी बहस के बीच यह फैसला फिर चर्चा में है। इस निर्णय के बाद वेंकटस्वामी आयोग और चिन्नप्पा रेड्डी आयोग ने भी मुसलमानों को पिछड़ा वर्ग माना। इसी क्रम में कांताराजू आयोग और जयप्रकाश हेगड़े के नेतृत्व वाले आयोगों ने भी मुस्लिम समुदाय को पिछड़े वर्ग में शामिल किया।

राजनीतिक मायने और इस्तीफे के कयास 

Siddaramaiah Political Crisisसियासी विश्लेषकों का कहना है कि इस रिपोर्ट का सार्वजनिक होना और मुख्यमंत्री को सौंपा जाना राज्य की सियासत में नया मोड़ ला सकता है। पिछले कुछ महीनों से मुख्यमंत्री पद परिवर्तन के कयास लगाए जा रहे थे। रिपोर्ट मिलने के एक दिन पहले, उनके समर्थकों ने इस्तीफे की अफवाहों को लेकर प्रदर्शन भी शुरू कर दिया।

Siddaramaiah ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रिपोर्ट उन्हें राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा प्रदान की गई है और इसे स्वीकार किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्ट ईमानदारी से तैयार की गई है और उम्मीद है कि इसे जल्द स्वीकार कर लिया जाएगा।

कर्नाटक की जातिगत जनगणना रिपोर्ट राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुस्लिम समुदाय को राज्य का सबसे बड़ा समुदाय बताया गया है, जबकि लिंगायत, वोक्कालिगा और कुरुबा समुदाय क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे सबसे बड़े समुदाय हैं। रिपोर्ट राज्य की सियासत में नई बहसों और नीति निर्माण के लिए अहम आधार बनेगी।

Read This Also:- Delhi Digital Ration: CBDC से रुकेगी राशन की चोरी और कालाबाजारी

For all the political updates download our Molitics App : Click here to Download