
Kuldeep Singh Sengar की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की
Kuldeep Sengar Bail: सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह मुख्य अपील पर अगले दो महीने के भीतर सुनवाई पूरी करे। इससे पहले, निचली अदालत ने कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे राहत देते हुए सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए जमानत दे दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई के पीछे मुख्य वजह थी कि हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर CBI की अपील लंबित थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट इस मामले में नए सिरे से फैसला ले और पिछले आदेश से प्रभावित न हो।
हाईकोर्ट ने दी थी राहत
Kuldeep Sengar Bail: दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की आयुर्वादीय सजा को निलंबित करते हुए जमानत दी थी। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद सेंगर को कोर्ट में सुनवाई पूरी होने तक राहत मिली थी, लेकिन सीबीआई ने इस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की। इसी मामले को लेकर कुलदीप सेंगर की जमानत अब चर्चा में है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में इस सजा निलंबन आदेश पर पहले ही रोक लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट को दो महीने के भीतर अपील पर नया निर्णय देना होगा।
सुनवाई के लिए निर्देश और प्रक्रिया
Kuldeep Sengar Bail: सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची शामिल थे, ने कहा कि अगर हाईकोर्ट को लगता है कि दो महीने में निर्णय संभव नहीं है, तो वह सभी पक्षों, जिसमें शिकायतकर्ता के वकील शामिल हैं, को सुनने के बाद सजा स्थगन पर नया आदेश पारित कर सकता है। इसी सुनवाई के बीच फिर चर्चा में आ गई कुलदीप सेंगर की जमानत।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अपील लंबित रहने के बावजूद न्याय प्रक्रिया बाधित न हो और निचली अदालत का निर्णय जल्द पूरा हो।
CBI की अपील और सॉलिसिटर जनरल का बयान
CBI Appeal Hearing: CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि अपील की अगली सुनवाई 25 मई को हाईकोर्ट में होगी। उन्होंने कोर्ट को सूचित किया कि वह सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
सेंगर के वकील ने कहा कि वे अपील प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल रहे हैं, लेकिन अब सजा निलंबन आदेश पर रोक लग चुकी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पीड़िता नाबालिग नहीं थी, और सेंगर को लोक सेवक होने के नाते विशेष संरक्षण मिलने का आधार है।
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को यह भी याद दिलाया कि इस मामले में यह सवाल उठता है कि एक विधायक क्या लोक सेवक माना जाता है या नहीं, जिसे हाईकोर्ट को ध्यान में रखकर निर्णय लेना होगा।
सुप्रीम कोर्ट की ठोस प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि अब सेंगर को राहत नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अपील पर दो महीने में फैसला पूरा होना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट को पिछले आदेश के रद्द होने के फैसले से प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसका मतलब है कि हाईकोर्ट को स्वतंत्र रूप से सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करना होगा और निष्पक्ष निर्णय देना होगा।
केस की पृष्ठभूमि
Unnao Rape Case: कुलदीप सेंगर पर आरोप है कि उन्होंने नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण किया। इस मामले में निचली अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने सेंगर की सजा को अस्थायी रूप से निलंबित कर जमानत दे दी थी।
सीबीआई ने हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ याचिका दायर की और सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सजा निलंबन पर रोक लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने और दो महीने में अपील सुनवाई पूरी करने का आदेश देकर मामले में नई दिशा तय की है।
अब आगे की प्रक्रिया
दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देश मिला है कि वह मुख्य अपील पर नए सिरे से विचार करे। यदि कोर्ट को लगता है कि दो महीने में फैसला संभव नहीं है, तो सभी पक्षों को सुनने के बाद सजा स्थगन पर नया आदेश पारित किया जा सकता है।
इस आदेश के बाद, कुलदीप सेंगर की जमानत समाप्त हो गई है और वह कोर्ट की निगरानी में ही रहेंगे।
इस नए आदेश से उन्नाव रेप केस में न्याय प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है और यह स्पष्ट संकेत है कि सुप्रीम कोर्ट गंभीर मामलों में जमानत और सजा के मामले में कोई रियायत नहीं देता।
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