
ईरान-अमेरिका संघर्ष में सीजफायर, भारत ने किया स्वागत
ईरान-अमेरिका संघर्ष में सीजफायर की घोषणा के बाद अमेरिका और ईरान ने दो हफ्ते के लिए युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान की सरकार के बीच हुई इस सहमति के बाद पिछले एक महीने से जारी संघर्ष फिलहाल रुक गया है। इस बीच पाकिस्तान समेत कई देशों ने इस कदम का स्वागत किया है। भारत ने भी इसे क्षेत्रीय स्थायीत्व और शांति की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानते हुए प्रतिक्रिया दी है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष में सीजफायर
विदेश मंत्रालय ने बुधवार, 8 अप्रैल 2026 को अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारत ईरान-अमेरिका संघर्ष में सीजफायर का स्वागत करता है और आशा करता है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान केवल संवाद, कूटनीति और तनाव कम करने के प्रयासों से ही संभव है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी जोर देकर कहा कि यह कदम ईरान अमेरिका तनाव और मध्य पूर्व युद्ध से उत्पन्न तनाव को कम करने और आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले संकटों को हल करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने कहा कि इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क पर गंभीर असर डाला है।
होरमुज और व्यापार प्रभावित
विदेश मंत्रालय ने होरमुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार उम्मीद करती है कि जलडमरूमध्य में नौवहन और वैश्विक व्यापार सुचारू रूप से जारी रहेगा। यह क्षेत्र पहले से ही रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, और सीजफायर से व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने में मदद मिल सकती है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले किए थे। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारी हताहत हुए। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इस संघर्ष का असर न केवल क्षेत्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर भी पड़ा।
लगभग 40 दिनों तक चले इस संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान दोनों ने युद्धविराम पर सहमति जताई। राष्ट्रपति ट्रंप ने रात 8 बजे की समय सीमा से ठीक पहले यह घोषणा की, जिससे कुछ घंटों के भीतर दो हफ्ते का युद्धविराम लागू हो गया।
आशा और संभावनाएं
भारत ने इसे एक सकारात्मक कदम मानते हुए क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह युद्धविराम केवल अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी शांति की दिशा में पहला संकेत हो सकता है।
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