
जब स्कूल में शिक्षा की जगह, गुंडागर्दी होने लगे, तब इस देश का भविष्य कैसे उज्जवल हो सकता है?
फीस के नाम पर मोटी रकम अभिभावकों से लेने के लिए मासूम बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया जाए, तो कैसे होगा देश का भविष्य उज्जवल?
एक ऐसा ही स्कूल है "रियान इंटरनेशनल स्कूल," (Ryan International School) जो विवादों में रहता है। कई बार मासूम बच्चों के साथ इस स्कूल में बदसलूकी होने के मामले सामने आए हैं, एक बार फिर "रियान इंटरनेशनल स्कूल," (Ryan International School) विवादों की सुर्खियों में इसका नाम शामिल है।

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में स्कूलों की मनमानी पर कोई भी रोक नहीं है। स्कूल के संचालक आम जनता को खुलेआम लूट रहे है। कभी ड्रेस के नाम पर, कभी नहीं किताबों के नाम पर, यह हर साल नया सेशन शुरू होने के साथ ही होने लगता है। नया सत्र शुरू होते ही निजी स्कूलों में फीस की बढ़ोतरी हो जाती है। वही प्रकाशकों ने 30% कॉपी और किताबों के दाम बढ़ा दिए और थोड़ी बहुत कसर जो बची होती है उसे स्कूलों की ओर से कुछ दुकानों को जो एकाधिकार दे रखी है, वह पूरी कर देते है। इस कारण अभिभावकों को मजबूरन महंगे दामों में स्कूल ड्रेस और स्टेशनरी का सामान खरीदने पड़ता हैं।
ग्रेटर नोएडा के "रियान इंटरनेशनल स्कूल" (Greater Noida Ryan International School) पर आरोप लग रहे हैं कि उसने बच्चों को विश पूरी ना देने पर क्लास रूम से बाहर निकाल दिया और इतने पर भी इनका मन नहीं भरा तो इन लोगों ने छोटे-छोटे मासूम बच्चों को स्टोर रूम और मेडिकल रूम में छुट्टी होने तक बिठाए रखा। इस दौरान इन छोटे-छोटे बच्चों को ना तो पानी पीने के लिए स्टोर रूम से बाहर जाने दिया जाता है और ना ही वॉशरूम जाने का समय दिया जाता है। यह बच्चे डरे हुए हैं इनके साथ-साथ इनके परिजन भी डर के माहौल में हैं। बच्चों के माता-पिता को भी डर लग रहा है, क्योंकि यह जो घटना सामने आई है उस स्कूल का नाम सुनकर किसी को भी डर लगेगा।
हरियाणा के गुरुग्राम में जो "रियान इंटरनेशनल स्कूल" (Gurugram Ryan International School) है, उसी में 5 साल पहले एक मासूम बच्चे की हत्या कर दी जाती है और स्कूल प्रशासन इस हत्या के मामले में स्कूल बस के गरीब ड्राइवर को फसाने की कोशिश करते हैं।

अभिभावकों की मुश्किलों को ऐसे समझा जा सकता है कि हर साल फीस बढ़ा दी जाती है, पढ़ाई महंगी होती जा रही है लेकिन बच्चों के भविष्य के लिए परिजन या अभिभावक अपनी जरूरतों का त्याग कर बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए निजी स्कूलों में भेजते हैं। वहां एक अलग ही गुंडागर्दी चल रही होती है। इस मामले को लेकर करीब 1 साल से इन अभिभावकों का साथ दे रहे समाज सेवक प्रवीण भारती (Social Worker Praveen Bharti) ने कहा कि "किसी राजनीतिक सहायता के बिना किसी स्कूल की प्रिंसिपल ऐसा नहीं कर सकती है। उसने अभिभावकों को डराया कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।" प्रवीण भारती का कहना है कि "इनकी FIR नहीं लिखी गई है। वही प्रिंसिपल इन अभिभावकों को अकड़ दिखा रही हैं कि उसका राजनीतिक बैकग्राउंड है उसका कोई कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता है।"
इस कारणवश स्कुल वालों को किसी का डर नहीं है। 50% छूट पर बच्चों को 12वीं तक बढ़ाने का वादा किया जाता है, लेकिन एडमिशन होने के बाद बच्चों की सारे डॉक्यूमेंट स्कूल में जमा होने के बाद, अभिभावकों से पूरी फीस देने का दबाव बनाया जाता है। इसके लिए मासूम बच्चों को स्टोर रूम और मेडिकल रूम में छुट्टी होने तक रखा जाता है। इन बच्चों का दूसरे स्कूल में एडमिशन नहीं हो सकता है क्योंकि इन्हें स्थानांतरण प्रमाणपत्र (Transfer Certificate) नहीं दी जा रही, ना तो हम इन बच्चों को पढ़ाएंगे और ना ही कहीं और पढ़ने देंगे।
बड़ी बात यह है कि उत्तर प्रदेश में शुल्क नियामक अधिनियम 2018 (Fee Regulatory Act 2018) लागू है। मतलब स्कूल 5% के अलावा उस साल का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) (Consumer Price Index) या फिर टीचर की बढ़ाई गई सैलरी दोनों में से जो कम उसे 5% में जोड़कर स्कूल बढ़ा सकते हैं। उसके बाद भी प्राइवेट स्कूल अपनी मनमानी कर रहे हैं।
वही अभिभावकों को प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि वो जल्द ही उनकी समस्या का समाधान निकालेंगे। इस मामले में "रेयान इंटरनेशनल स्कूल" (Ryan International School) पर जांच समिति लगाई गई है, जिसके लिए एक जांच कमेटी का गठन किया गया। स्कूल को कहा गया है कि जब तक कोई निर्णाय नहीं लिया जाता है, बच्चों को क्लास में बैठने से नहीं रोका जाए।
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