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वक्फ बिल पर टूटी विपक्ष की एकता! शिवसेना-यूबीटी ने कहा- अब नहीं लड़ेंगे कानूनी लड़ाई
05 Apr 2025

वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन में स्पष्ट मतभेद उभरकर सामने आ गए हैं। जहां एक ओर कांग्रेस और डीएमके ने इसे असंवैधानिक बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, वहीं दूसरी ओर शिवसेना-यूबीटी जैसे सहयोगी दल अब इस मुद्दे को यहीं समाप्त मान रहे हैं। यह स्थिति विपक्षी एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है, खासकर तब जब विधेयक को लेकर संसद में तीखी बहस और विरोध देखा गया था।
कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंची, शिवसेना-यूबीटी ने कह दिया ‘अब आगे नहीं जाएंगे’
बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, जो वक्फ संशोधन विधेयक पर बनी जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) के सदस्य भी रहे हैं, ने इस विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका तर्क है कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता पर चोट करता है।
वहीं, शिवसेना-यूबीटी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अब इस विधेयक को लेकर अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाएगी। उन्होंने कहा, “हमने संसद में अपना कर्तव्य निभा लिया है। जो कुछ कहना था, वह लोकसभा और राज्यसभा में कह दिया गया है। अब हमारे लिए यह फाइल बंद हो चुकी है।”
संजय राउत ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यह विधेयक किसी धार्मिक एजेंडे का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे विशुद्ध रूप से एक ‘कॉरपोरेट एजेंडा’ काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “इस बिल का हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं है। जो लोग इसे धार्मिक चश्मे से देख रहे हैं, वे ग़लतफ़हमी में हैं। असल में यह विधेयक वक्फ संपत्तियों को बड़े उद्योगपतियों के लिए आसान शिकार बनाने की तैयारी है।”
एनसीपी ने उठाए सवाल, विपक्षी एकता पर संकट
राज्यसभा में विधेयक पर हुई बहस के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने शिवसेना-यूबीटी के रवैये पर अप्रत्यक्ष कटाक्ष किया। उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब विपक्षी दलों ने मिलकर संसद में विधेयक का विरोध किया, तो अदालत में एकजुट रुख क्यों नहीं अपनाया जा रहा? गौरतलब है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक को लोकसभा में 288 मतों से समर्थन मिला, जबकि विपक्ष में 232 वोट पड़े। राज्यसभा में यह विधेयक 128 समर्थन और 95 विरोधी मतों के साथ पारित हुआ। अब इसे राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजा गया है, जिसके बाद केंद्र सरकार इसकी अधिसूचना जारी कर देशभर में इसे लागू कर सकती है।