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वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के बीच ट्रंप ने टैरिफ को बताया ‘बड़ा और सुंदर सौदा’

 05 Apr 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपनी व्यापार नीतियों के तहत लगाए गए प्रतिशोधात्मक टैरिफ को लेकर उठ रही वैश्विक मंदी की आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि यह नीति न केवल अमेरिका को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाएगी, बल्कि इसे एक "बड़ा, सुंदर सौदा" बताते हुए कहा कि इससे अंततः अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर शुक्रवार को पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा, "बड़े व्यवसाय टैरिफ को लेकर चिंतित नहीं हैं क्योंकि वे जानते हैं कि ये यहीं रहने वाले हैं। उनका ध्यान उस बड़े, सुंदर सौदे पर है, जो हमारी अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करेगा। यह बहुत महत्वपूर्ण है—और यह जारी है!" हालांकि, ट्रंप के इस आत्मविश्वास के उलट उनकी नीतियों का असर वैश्विक बाज़ारों पर गहरा पड़ता दिख रहा है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में उथल-पुथल मच गई है। केवल दो दिनों में, अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स S&P 500 से लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर का बाजार मूल्य मिट गया।


वित्तीय संस्थानों की चेतावनी

ट्रंप के टैरिफ युद्ध का असर अमेरिका के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों — चीन, कनाडा और मैक्सिको — पर सीधा पड़ा है। जवाबी टैरिफ की होड़ में निवेशकों की बेचैनी बढ़ गई है। जेपी मॉर्गन ने वैश्विक मंदी की संभावना को 40% से बढ़ाकर 60% कर दिया है, जबकि गोल्डमैन सैक्स ने भी इसे 20% से बढ़ाकर 35% करार दिया। वहीं, एसएंडपी ग्लोबल जैसी रेटिंग एजेंसियों ने भी व्यापार युद्ध की दिशा को लेकर चिंता जताई है, जिससे वॉल स्ट्रीट में अनिश्चितता और डर का माहौल बन गया है।

ट्रंप की रणनीति को कई अर्थशास्त्री 1930 के कुख्यात स्मूट-हॉली टैरिफ एक्ट से तुलना कर रहे हैं, जिसे आर्थिक इतिहास में महामंदी का ट्रिगर माना जाता है। उनका मानना है कि इस प्रकार के संरक्षणवादी उपाय वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित कर सकते हैं, जिससे वैश्विक मंदी की संभावना और प्रबल हो जाती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने भी चेतावनी दी कि इन नीतियों के चलते “उच्च मुद्रास्फीति और निम्न आर्थिक वृद्धि” की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। लेकिन ट्रंप ने पलटवार करते हुए कहा, "ब्याज दरों में कटौती करो, जेरोम, और राजनीति करना बंद करो।"

जहाँ एक ओर निवेशक, नीति-निर्माता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ सतर्क हैं, वहीं ट्रंप का रुख पूरी तरह आश्वस्त दिखता है। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि यह “अमीर बनने का बेहतरीन समय” है। हालाँकि यह स्पष्ट है कि ट्रंप की टैरिफ नीति अमेरिका को केंद्र में रखती है, लेकिन इसकी अनुगूंज अब दुनिया के दूसरे कोनों तक पहुँच रही है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप की 'बड़ी डील' क्या वाकई वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका देने के बजाय उसे मजबूती दे पाती है या नहीं।