बोकारो स्टील प्लांट के मुख्यालय के बाहर गुरुवार को रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे विस्थापित युवाओं पर सीआईएसएफ द्वारा किए गए कतिथ लाठीचार्ज में एक 23 वर्षीय युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान प्रेम महतो के रूप में हुई है, जो विस्थापित अप्रेंटिस संघ (वीएएस) के नेतृत्व में आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल था। प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी, जब प्रदर्शनकारियों ने प्लांट के मुख्य द्वार पर लगे बैरिकेड्स को धकेलने की कोशिश की।
सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें पीछे हटाने की कोशिश की, इसी दौरान प्रेम महतो के सिर पर कथित रूप से लाठी लगी और वह वहीं गिर पड़े। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना में कम से कम 15 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं, जिनमें एक व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है और वह आईसीयू में भर्ती है। घटना के बाद बोकारो शहर में तनाव फैल गया है। गुरुवार रात से ही शहर बंद है और स्टील प्लांट का संचालन पूरी तरह से ठप हो गया है। प्लांट के अंदर हजारों कर्मचारी फंसे हुए हैं।
बोकारो की उपायुक्त विजया जाधव ने बताया कि मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही, घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। बीएसएल के मुख्य महाप्रबंधक को गिरफ्तारी के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
"1967 में ली गई ज़मीन, अब तक अधूरी हैं वादे"
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्टील प्लांट की स्थापना के समय 34,000 एकड़ ज़मीन अधिग्रहित की गई थी, जिसके बदले 20,000 नौकरियों का वादा किया गया था। लेकिन आज तक हजारों विस्थापित युवाओं को सिर्फ़ इंतजार के लिए छोड़ दिया गया है।
विरोध में शामिल सहदेव साओ ने बताया, "हम 2016 से ही नौकरी की मांग कर रहे हैं। उस दौरान हमने नहर तोड़ी थी, जिसके बाद 52 लोगों को सात महीने जेल में रहना पड़ा था।"
एक अन्य युवक ने बताया कि 2016 में 4,328 युवाओं को नौकरी देने का वादा किया गया था और 45 वर्ष से अधिक आयु वालों को दुकान खोलने के लिए सहायता देने की बात कही गई थी। लेकिन 2016 से 2022 के बीच केवल 1,500 युवाओं को ही अप्रेंटिसशिप का मौका दिया गया। हर चरण में भर्तियों की संख्या घटती चली गई।