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वक्फ संशोधन पर फूटा NDA सहयोगी का गुस्सा, पारस बोले- भावनाओं को ठेस पहुंची
05 Apr 2025

बिहार में वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रमुख सहयोगी दलों में से एक, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) ने भी इस विधेयक का विरोध किया है। पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने बिल के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उनके इस बयान से एनडीए में मतभेद की दरारें और गहरी होती दिखाई दे रही हैं।
“भारत एक बगीचा है… सभी फूलों को खिलने का हक़ है”
पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने कहा, “मैं वक्फ संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध करता हूं। भारत एक बगीचे की तरह है, जहां सभी धर्मों और जातियों के लोग मिलजुलकर रहते हैं। संविधान ने सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार दिया है। ऐसे में किसी एक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कोई भी कानून देश की आत्मा के खिलाफ है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस बिल के जरिए एक खास वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। “बाबा साहब अंबेडकर के बनाए संविधान के अनुसार, सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन यह विधेयक इन अधिकारों पर चोट करता है।”
पारस ने स्पष्ट रूप से कहा कि जदयू जैसी पार्टियों के भीतर भी इस बिल को लेकर असहमति है। “भाजपा हो या जदयू, या फिर कोई और दल—सभी दलों में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े नेताओं के बीच असंतोष है। यह स्वाभाविक है कि जब किसी समुदाय को चोट पहुंचेगी, तो विरोध उठेगा।”
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही जदयू के कई मुस्लिम नेताओं ने इस बिल के विरोध में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। अब पारस के बयान से एनडीए के अंदरूनी हालात और असहज हो गए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जहां चाचा पशुपति पारस वक्फ बिल के खिलाफ खड़े हैं, वहीं उनके भतीजे और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने संसद में इस बिल के समर्थन में मतदान किया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि पासवान परिवार में भी इस मुद्दे पर मतभेद है।