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"आज क्या बोलूं, समझ नहीं आ रहा" – सदन में प्रफुल्ल पटेल का संजय राउत पर कटाक्ष

 04 Apr 2025

राज्यसभा ने गुरुवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित कर दिया। विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में एनडीए और इंडिया गठबंधन के नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली। इसी दौरान एनसीपी (अजीत पवार गुट) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत पर व्यंग्य करते हुए कई तीखे और चुटीले तंज कसे, जिससे सदन में कई बार ठहाके गूंज उठे।

'हमारे दोस्त आ गए...' — व्यंग्य के साथ स्वागत

प्रफुल्ल पटेल जब बिल पर अपनी बात रख रहे थे, उस समय संजय राउत सदन में मौजूद नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति में ही शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कुछ टिप्पणी करने की कोशिश की, जिस पर पटेल ने तंज कसते हुए कहा, "आप मत बोलिए, आप तो पहले दूसरी पार्टी में थीं।" तभी संजय राउत सदन में पहुंचे। उन्हें देखते ही प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "आ गए, हमारे दोस्त आ गए।" राउत ने भी मुस्कराते हुए हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया।

इसके बाद पटेल ने साल 1992-93 के बाबरी विध्वंस और मुंबई दंगों का जिक्र करते हुए संजय राउत के पुराने बयानों की याद दिलाई। उन्होंने कहा, "ये कहते थे कि हमें अभिमान है कि हमने बाबरी मस्जिद गिराई... और 92-93 के मुंबई दंगों में मेरे शिवसैनिकों ने हिंदुओं की रक्षा की। आपने यही कहा था ना? धन्य हैं आप। हम तो कुछ भी नहीं। आप जो कहना चाहें कहें।" प्रफुल्ल पटेल ने आगे कहा, "पहली बार हमारे संजय भैया का भाषण लंबा चला... नहीं तो टक टक टक बोलते थे। आज तो समझ ही नहीं आ रहा है कि क्या बोलें और क्या नहीं।" उन्होंने इशारा करते हुए जोड़ा, "देखिए, अभी भी संजय भैया ऐसे ही कर रहे हैं। कृपया आप अपना रंग मत बदलिए।" इस पर सदन में मौजूद अन्य सांसदों की ओर से हंसी-ठिठोली की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

'भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है' — संविधान की बात

अपने संबोधन के अंतिम चरण में प्रफुल्ल पटेल ने राज्यसभा के सभापति को संबोधित करते हुए कहा, "मेरा विनम्र निवेदन है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, और रहेगा। यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम भारत के संविधान के अनुरूप इसे एक लोकतांत्रिक और समावेशी गणराज्य बनाए रखें।" पटेल ने विपक्ष की ओर से बार-बार उठाए गए ‘नागपुर-नागपुर’ के उल्लेखों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नागपुर गए थे, तब वे दीक्षाभूमि भी गए थे। उन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर को नमन किया, जो करोड़ों भारतीयों की आस्था और प्रेरणा का प्रतीक हैं। विपक्ष इस सकारात्मक पक्ष को नजरअंदाज क्यों करता है?" इस पूरी बहस के बीच गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर कई घंटे लंबी चर्चा चली। बिल पर वोटिंग देर रात हुई, जिसमें 128 सांसदों ने बिल के पक्ष में और 95 ने विरोध में मतदान किया। इससे पहले बुधवार को यह बिल लोकसभा से भी पारित हो चुका है।