
Article
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संपत्ति होगी सार्वजनिक, जजों की बैठक में लिया गया अहम फैसला
03 Apr 2025

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने अपनी संपत्तियों का ब्योरा सार्वजनिक करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस फैसले पर मुहर लगाने के लिए मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना सहित शीर्ष अदालत के 30 न्यायाधीशों की बैठक हुई, जहां सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि जज अपनी संपत्तियों की जानकारी सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, 1 अप्रैल को हुई बैठक में यह संकल्प लिया गया कि भविष्य में जब भी कोई न्यायाधीश पदभार ग्रहण करेगा या कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालेगा, तो उसे अपनी संपत्तियों की जानकारी मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
यह निर्णय 1997 के एक प्रस्ताव का विस्तार है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को अपनी संपत्ति की घोषणा मुख्य न्यायाधीश के सामने करनी होती थी। 2009 में एक और संशोधन हुआ, जिसमें संपत्तियों की घोषणा को न्यायालय की वेबसाइट पर प्रकाशित करने का विकल्प दिया गया था, लेकिन यह ऐच्छिक था और सभी न्यायाधीशों ने इसे अपनाने का फैसला नहीं किया था।
अब पहली बार, सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने सामूहिक रूप से संपत्तियों के सार्वजनिक प्रकटीकरण पर सहमति जताई है।
यशवंत वर्मा मामले के बाद लिया गया निर्णय
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े विवाद के बाद लिया गया है। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने की घटना के बाद वहां से कथित रूप से जली हुई नकदी की गड्डियां बरामद हुई थीं। इस घटना के कारण काफी विवाद हुआ और बाद में उनका तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कर दिया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उनका स्थानांतरण इस विवाद से संबंधित नहीं था।
इस प्रकरण ने न्यायपालिका में पारदर्शिता की आवश्यकता को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया। जनता और मीडिया के दबाव के बीच यह सवाल उठने लगा कि क्या न्यायाधीशों को भी अन्य सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की तरह अपनी संपत्तियों का खुलासा करना चाहिए। इसी संदर्भ में, सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा अपनी संपत्तियों को सार्वजनिक करने का यह सामूहिक निर्णय लिया गया, जिससे न्यायपालिका की निष्पक्षता और पारदर्शिता को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष पर फैसला सुरक्षित
इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिनमें तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष पर कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस के विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाओं पर निर्णय लेने में अनावश्यक देरी करने का आरोप लगाया गया था।
न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रखने की घोषणा की। इस संबंध में दो याचिकाएं दायर की गई थीं—एक में तीन विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी, जबकि दूसरी याचिका दलबदल करने वाले शेष सात विधायकों से संबंधित थी।
पिछले साल नवंबर में, तेलंगाना उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष को तीनों विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर एक निश्चित समय सीमा के भीतर निर्णय लेना चाहिए। हालांकि, इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। अब, शीर्ष अदालत का निर्णय यह तय करेगा कि इस मुद्दे पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी और क्या विधानसभा अध्यक्ष पर किसी प्रकार की जिम्मेदारी तय की जाएगी।