लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह बिल सिर्फ एक बड़े वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि बीजेपी की नाकामी को छिपाने का जरिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी में यह मुकाबला चल रहा है कि "खराब हिंदू कौन बड़ा है?" अखिलेश यादव ने बीजेपी की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है, वह अभी तक अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुन पाई है। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा, "अखिलेश जी ने हंसते-हंसते सवाल किया, मैं भी हंसते-हंसते जवाब दे रहा हूं। आपको तो अध्यक्ष चुनने के लिए सिर्फ पांच लोगों में से ही फैसला करना होता है, परिवार के भीतर। हमें करोड़ों कार्यकर्ताओं में से चुनना पड़ता है, इसलिए समय लगता है।"
"बीजेपी अपनी नाकामी छिपाने के लिए बिल लाती है"
अखिलेश यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब बीजेपी अपनी असफलताओं को ढकने के लिए नए कानूनों का सहारा ले रही है। उन्होंने नोटबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि "आधी रात को फैसला लेकर नोट चलन से बाहर कर दिए गए, लेकिन आज भी पुराने नोटों के नए भंडार सामने आ रहे हैं।"
उन्होंने सरकार पर बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की आय दोगुनी करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी बीजेपी को अपनी असफलताओं का एहसास होता है, वह कोई नया बिल लेकर आती है ताकि जनता का ध्यान भटकाया जा सके।
अखिलेश यादव ने प्रयागराज महाकुंभ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार ने इसे 144 साल बाद होने वाला महाकुंभ बताकर प्रचारित किया, जबकि कुंभ हर 12 साल में होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुंभ में अव्यवस्थाओं के कारण 30 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग लापता हो गए, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। अखिलेश यादव जब महाकुंभ और अन्य मुद्दों पर बात कर रहे थे, तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, "अखिलेश जी, अब जरा वक्फ पर भी आ जाइए।" इसके बाद अखिलेश ने दोबारा वक्फ बिल पर अपनी बात रखी।
सपा प्रमुख ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में रेलवे और डिफेंस की जमीन बेची जा रही है, लेकिन जब वक्फ की जमीन की बात आती है, तो सरकार इसे हथियाने की कोशिश में लग जाती है। उन्होंने सवाल किया कि "क्या डिफेंस और रेलवे की जमीन नहीं बेची जा रही? क्या सरकार चीन द्वारा कब्जाई गई भारतीय जमीन पर कोई कार्रवाई करेगी?" अखिलेश यादव ने वक्फ बिल को एक सुनियोजित साजिश करार देते हुए कहा कि बीजेपी चाहती है कि मुसलमान इस बिल के खिलाफ आक्रोशित हों ताकि ध्रुवीकरण का माहौल बने। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनावी लाभ के लिए सांप्रदायिक तनाव को भड़काने का प्रयास कर रही है।
सपा प्रमुख ने बिल को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि जब करोड़ों लोग इसके खिलाफ हैं, तो इसे लाने की जरूरत ही क्या है? उन्होंने कहा कि बीजेपी वक्फ की जमीनें हड़पकर अपने करीबी लोगों को देना चाहती है। अपने भाषण के अंत में अखिलेश यादव ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि यह बिल बीजेपी के लिए वाटरलू की लड़ाई जैसा साबित होगा। उन्होंने कहा, "वाटरलू युद्ध में अजेय समझे जाने वाले नेपोलियन को करारी हार मिली थी। इसी तरह यह बिल बीजेपी के पतन की शुरुआत साबित होगा।"